
गूगल पर ₹8,900 करोड़ का जुर्माना! सर्च में अपना फायदा और प्ले स्टोर पर पाबंदियां पड़ीं भारी
यूरोपीय आयोग ने डिजिटल मार्केट्स एक्ट के दो उल्लंघनों में गूगल पर कुल 89 करोड़ यूरो, यानी लगभग ₹8,900 करोड़ का जुर्माना लगाया है। इनमें 46 करोड़ यूरो का दंड गूगल सर्च में अपनी सेवाओं को कथित अनुचित बढ़त देने और 43 करोड़ यूरो का दंड गूगल प्ले पर ऐप डेवलपर्स को वैकल्पिक व सस्ते खरीद विकल्पों की जानकारी देने से रोकने के लिए लगाया गया है। गूगल को 60 दिनों के भीतर नियमों का पालन करना होगा।

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दो फैसले... 89 करोड़ यूरो का जुर्माना और गूगल को 60 दिन
टेक्नोलॉजी डेस्क। दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन पर सवाल उसके परिणामों की गति को लेकर नहीं, बल्कि उनकी निष्पक्षता को लेकर उठा है। यूरोपीय आयोग ने गूगल पर एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग मामलों में कुल 89 करोड़ यूरो का जुर्माना लगाया है।
पहला मामला गूगल सर्च से जुड़ा है।
दूसरा गूगल प्ले स्टोर से।
आयोग का आरोप है कि गूगल ने अपने विशाल डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल प्रतिस्पर्धी कंपनियों को बराबरी का अवसर देने के बजाय अपनी सेवाओं को लाभ पहुंचाने के लिए किया।
अब गूगल को सिर्फ जुर्माना ही नहीं भरना है। कंपनी को 60 दिनों के भीतर अपनी व्यावसायिक व्यवस्था को यूरोपीय संघ के नियमों के अनुरूप भी बनाना होगा। ऐसा नहीं होने पर अतिरिक्त आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।
सर्च किया कुछ और... सबसे आगे गूगल की अपनी सेवा?
यूरोपीय आयोग की पहली आपत्ति गूगल सर्च में दिखाई देने वाले परिणामों को लेकर है। आयोग के अनुसार, होटल, फ्लाइट, शॉपिंग और दूसरी व्यावसायिक सेवाओं की खोज के दौरान गूगल ने अपने उत्पादों और विकल्पों को प्रतिद्वंद्वी प्लेटफॉर्म की तुलना में अधिक प्रमुखता दी।
इसे तकनीकी भाषा में सेल्फ-प्रेफरेंसिंग कहा जाता है। आरोप यह नहीं है कि गूगल अपनी सेवा दिखा ही नहीं सकता।
सवाल यह है कि क्या वह सर्च इंजन पर अपने नियंत्रण का इस्तेमाल अपनी सेवाओं को ऐसी जगह और ऐसा स्वरूप देने के लिए कर रहा था, जो प्रतिस्पर्धी कंपनियों को उपलब्ध नहीं था?
आयोग ने इसी मामले में गूगल पर 46 करोड़ यूरो का जुर्माना लगाया है।
प्ले स्टोर के बाहर सस्ता विकल्प... लेकिन ग्राहक तक जानकारी कैसे पहुंचे?
दूसरा मामला गूगल प्ले स्टोर की नीतियों से जुड़ा है।
यूरोपीय आयोग के अनुसार, ऐप डेवलपर्स को अपने उपयोगकर्ताओं को यह बताने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा था कि वही सब्सक्रिप्शन, डिजिटल सेवा या खरीद किसी बाहरी वेबसाइट अथवा दूसरे माध्यम पर कम कीमत में उपलब्ध हो सकती है।
इसे एंटी-स्टीयरिंग प्रतिबंध कहा जाता है।
आयोग का कहना है कि ऐप डेवलपर्स को अपने ग्राहकों को वैकल्पिक खरीद माध्यमों की जानकारी देने और वहां भेजने की पर्याप्त स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। इस उल्लंघन के लिए गूगल पर अलग से 43 करोड़ यूरो का दंड लगाया गया है।
गूगल का तर्क—बदलाव से सुरक्षा और सेवाओं पर पड़ेगा असर
गूगल ने यूरोपीय आयोग के निष्कर्षों से असहमति जताई है। कंपनी का तर्क है कि उसने नियमों का पालन करने के लिए अपने सर्च परिणामों और प्ले स्टोर व्यवस्था में कई बदलाव किए हैं। गूगल का यह भी कहना है कि आयोग की मांगों के मुताबिक अतिरिक्त बदलाव किए गए तो उपयोगकर्ताओं को मिलने वाली सुविधाएं कमजोर हो सकती हैं और सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
कंपनी फैसले को कानूनी चुनौती देने की तैयारी में है।
लेकिन अपील की संभावना से फिलहाल आयोग का आदेश स्वतः समाप्त नहीं होता। गूगल को तय अवधि में अनुपालन दिखाना होगा या कानूनी मंच से राहत हासिल करनी होगी।
डिजिटल मार्केट्स एक्ट आखिर है क्या?
यूरोपीय संघ ने डिजिटल मार्केट्स एक्ट यानी डीएमए को बड़ी टेक कंपनियों के बाजार प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए लागू किया है।
यह कानून उन विशाल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विशेष जिम्मेदारियां डालता है, जिन्हें यूरोपीय संघ गेटकीपर मानता है।
गेटकीपर वे कंपनियां हैं जिनके प्लेटफॉर्म के जरिए बड़ी संख्या में उपभोक्ता और कारोबारी डिजिटल बाजार तक पहुंचते हैं।
इन कंपनियों से अपेक्षा की जाती है कि वे—
प्रतिस्पर्धी सेवाओं के साथ भेदभाव न करें।
अपनी सेवाओं को अनुचित बढ़त न दें।
कारोबारियों को ग्राहकों तक पहुंचने के वैकल्पिक रास्तों से न रोकें।
और अपने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बाजार पर एकतरफा नियंत्रण के लिए न करें।
गूगल के खिलाफ यह कार्रवाई डीएमए के तहत कंपनी पर लगाया गया पहला आर्थिक दंड है।
जुर्माने से बड़ा सवाल—क्या बदलेगा गूगल सर्च?
89 करोड़ यूरो की राशि बड़ी है।
लेकिन असली असर जुर्माने से अधिक उन बदलावों में छिपा है, जो गूगल को अपनी सेवाओं में करने पड़ सकते हैं।
क्या होटल या फ्लाइट खोजते समय गूगल की अपनी सेवाओं और प्रतिद्वंद्वी प्लेटफॉर्म को समान दृश्यता मिलेगी?
क्या ऐप डेवलपर अपने ऐप के भीतर बता पाएंगे कि सब्सक्रिप्शन बाहर कम कीमत में उपलब्ध है?
क्या गूगल प्ले के बाहर भुगतान करने का रास्ता उपभोक्ताओं के लिए अधिक स्पष्ट होगा?
और क्या इन बदलावों का असर यूरोप से बाहर के देशों में भी दिखाई देगा?
इन सवालों के जवाब गूगल की अगली अनुपालन योजना में मिल सकते हैं।
60 दिन में बदलाव नहीं तो और बढ़ सकता है दंड
यूरोपीय आयोग ने गूगल को अपने दोनों फैसलों का पालन करने के लिए 60 दिन दिए हैं।
आयोग के मुताबिक, अनुपालन नहीं करने पर कंपनी पर उसके औसत दैनिक वैश्विक कारोबार के आधार पर समय-समय पर अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है। यह दंड अधिकतम पांच प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
यानी यह मामला 89 करोड़ यूरो के जुर्माने पर खत्म होना जरूरी नहीं है।
यदि आयोग को लगा कि गूगल ने सिर्फ दिखावटी बदलाव किए हैं और मूल व्यवस्था अब भी प्रतिस्पर्धियों को नुकसान पहुंचा रही है, तो अगला आर्थिक प्रहार अधिक भारी हो सकता है।
अमेरिका और यूरोप के बीच नई टकराहट
फैसला अब केवल तकनीकी कानून और प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रहा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय संघ की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ अनुचित कदम बताया है। अमेरिका ने यूरोपीय संघ की व्यापारिक गतिविधियों की जांच की बात भी कही है।
दूसरी तरफ यूरोपीय आयोग का रुख है कि उसकी कार्रवाई कंपनी की राष्ट्रीयता के आधार पर नहीं, बल्कि यूरोपीय कानून के उल्लंघन के आधार पर की गई है।
इससे गूगल का मामला अमेरिका और यूरोप के बीच डिजिटल व्यापार, टेक रेगुलेशन और टैरिफ को लेकर चल रही खींचतान का नया केंद्र बन गया है।
क्या यह सिर्फ गूगल की मुश्किल है?
गूगल अकेली कंपनी नहीं है जिस पर यूरोपीय संघ ने डिजिटल बाजार के नियमों को लेकर कार्रवाई की है।
एप्पल और मेटा जैसी दूसरी बड़ी कंपनियां भी डीएमए के तहत जांच और दंड का सामना कर चुकी हैं।
लेकिन गूगल के मामले का असर अधिक व्यापक हो सकता है, क्योंकि कंपनी सर्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, ऐप स्टोर, विज्ञापन और ऑनलाइन खरीद—सभी प्रमुख डिजिटल रास्तों पर मजबूत मौजूदगी रखती है।
यही कारण है कि 89 करोड़ यूरो के जुर्माने से बड़ा सवाल अब यह है—
क्या गूगल सिर्फ जुर्माना भरकर आगे बढ़ जाएगा?
या यूरोपीय संघ का यह फैसला दुनिया के सबसे बड़े सर्च और ऐप इकोसिस्टम के काम करने का तरीका बदल देगा?
संपादकीय नोट: जुर्माने की आधिकारिक राशि 89 करोड़ यूरो है। रुपये में इसका मूल्य विनिमय दर के अनुसार बदलता रहेगा, इसलिए खबर में आधिकारिक यूरो राशि को प्राथमिकता देना अधिक सटीक होगा।

