LIVE
ताज़ा समाचार लोड हो रहे हैं...
होम
MP में निकाय-पंचायत चुनाव से पहले EVM का बड़ा सवाल, 87 हजार मशीनों की जरूरत; खरीदें या किराये पर लें?
मध्य प्रदेश में आगामी निकाय और पंचायत चुनावों के लिए अतिरिक्त EVM की व्यवस्था को लेकर आयोग के सामने दो विकल्प।लोकस्वामी ग्राफिक्स
Madhya Pradesh
ई-पेपर

MP में निकाय-पंचायत चुनाव से पहले EVM का बड़ा सवाल, 87 हजार मशीनों की जरूरत; खरीदें या किराये पर लें?

Digital News Desk3 min read10/09/26

मध्य प्रदेश में अगले साल नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ कराने की तैयारी के बीच ईवीएम की उपलब्धता बड़ा मुद्दा बन गई है। दोनों चुनाव एक चरण में कराने पर करीब 1.53 लाख ईवीएम की जरूरत होगी, जबकि राज्य निर्वाचन आयोग के पास फिलहाल 66 हजार मशीनें हैं। ऐसे में 87 हजार अतिरिक्त ईवीएम की व्यवस्था करनी होगी। इन्हें खरीदने पर करीब 250 से 300 करोड़ रुपए का खर्च अनुमानित है, जबकि दूसरे राज्यों से किराये पर लेने पर करीब 20 करोड़ रुपए में काम हो सकता है।

Lokswami AI

अगले साल मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ कराने की तैयारी है, लेकिन चुनाव से पहले ही एक बड़ा सवाल सामने खड़ा हो गया है—इतनी बड़ी संख्या में ईवीएम कहां से आएंगी?

राज्य निर्वाचन आयोग के पास फिलहाल करीब 66 हजार ईवीएम उपलब्ध हैं। यदि दोनों चुनाव एक साथ और एक चरण में कराने की स्थिति बनती है तो करीब 1.53 लाख मशीनों की जरूरत पड़ेगी। यानी आयोग को लगभग 87 हजार अतिरिक्त ईवीएम की व्यवस्था करनी होगी।

अब आयोग के सामने दो रास्ते हैं—नई मशीनें खरीदी जाएं या दूसरे राज्यों से मशीनें किराये पर ली जाएं।

87 हजार मशीनों के लिए करोड़ों का हिसाब

नई ईवीएम खरीदने की स्थिति में सरकारी खजाने पर बड़ा खर्च आएगा। आयोग के अनुमान के मुताबिक अतिरिक्त मशीनों की खरीद पर करीब 250 से 300 करोड़ रुपए तक खर्च हो सकता है।

मशीन की मूल लागत के अलावा परिवहन, पैकेजिंग, पार्ट्स, सॉफ्टवेयर और टैक्स जैसी लागत भी जुड़ती है। इन सभी खर्चों को मिलाकर एक मशीन की औसत लागत करीब 27 से 28 हजार रुपए तक पहुंचने का अनुमान है।

हालांकि निकाय चुनावों में कई बार VVPAT का इस्तेमाल नहीं किया जाता। ऐसी स्थिति में केवल बैलेट यूनिट और कंट्रोल यूनिट के जरिए मतदान कराया जाता है, जिससे मशीन की लागत करीब 17,803 रुपए प्रति मशीन बताई गई है।

किराये का विकल्प क्यों ज्यादा सस्ता?

अगर आयोग नई मशीनों की जगह दूसरे राज्यों से ईवीएम किराये पर लेता है तो खर्च में बड़ा अंतर आएगा। अनुमान है कि 87 हजार मशीनें किराये पर लेने में करीब 20 करोड़ रुपए का खर्च हो सकता है।

यानी खरीद और किराये के विकल्प में सैकड़ों करोड़ रुपए का अंतर है। इसी वजह से राज्य निर्वाचन आयोग फिलहाल दोनों विकल्पों पर विचार कर रहा है।

राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव के मुताबिक आयोग के सामने दोनों विकल्प हैं और उपलब्धता, लागत तथा चुनावी जरूरत को देखते हुए फैसला किया जाएगा।

चुनाव से पहले मशीनों की उपलब्धता जरूरी

एक साथ चुनाव कराने की स्थिति में सिर्फ मशीनों की संख्या ही नहीं, बल्कि उनकी समय पर उपलब्धता भी महत्वपूर्ण होगी। नई मशीनों की खरीद में प्रक्रिया और समय लग सकता है। यही वजह है कि आयोग चुनावी कार्यक्रम आगे बढ़ने से पहले EVM की व्यवस्था सुनिश्चित करना चाहता है।

आयोग ने इस संबंध में राज्य सरकार को आगामी शीतकालीन सत्र में बजट प्रावधान के लिए प्रस्ताव भेजा है। अब सरकार के स्तर पर बजट और व्यवस्था को लेकर फैसला होना है।

पंचायत चुनाव भी EVM से कराने की तैयारी

इस बार मामला सिर्फ नगरीय निकाय चुनाव तक सीमित नहीं है। पंचायत चुनाव भी EVM से कराने की योजना है। दोनों चुनावों को एक साथ एक चरण में कराने पर मशीनों की जरूरत मौजूदा उपलब्धता से कहीं ज्यादा हो जाएगी।

ऐसे में आयोग के लिए समय रहते फैसला लेना जरूरी है, क्योंकि मशीनों की कमी चुनाव की तैयारियों को प्रभावित कर सकती है।

आयोग के सामने खरीद बनाम किराये का फैसला

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल खर्च का है। खरीद का विकल्प अपनाने पर बड़ी रकम खर्च होगी और मशीनों की खरीद प्रक्रिया में समय भी लगेगा। दूसरी ओर किराये पर मशीनें लेने से लागत काफी कम हो सकती है, लेकिन इसके लिए दूसरे राज्यों में उपलब्ध ईवीएम की संख्या और समय पर उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।

फिलहाल राज्य निर्वाचन आयोग दोनों विकल्पों का आकलन कर रहा है। आगामी स्थानीय चुनावों की तैयारी में EVM की व्यवस्था किस मॉडल से होगी, इसका फैसला आगे लिया जाना है।

संबंधित खबरें

MP में हाईटेक सुगम बसों की एंट्री, ड्राइवर ने शराब पी तो बस स्टार्ट नहीं होगी; रूट बदला तो बजेगा अलार्म
Madhya Pradesh

MP में हाईटेक सुगम बसों की एंट्री, ड्राइवर ने शराब पी तो बस स्टार्ट नहीं होगी; रूट बदला तो बजेगा अलार्म

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की नई बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए कई तकनीकी इंतजाम किए गए हैं। ब्रीथ एनालाइजर, CCTV, झपकी डिटेक्शन, लेन अलर्ट और ऑनलाइन टिकटिंग जैसी सुविधाएं बसों में होंगी।

पूरा खबर
MP Top 5 News: फर्जी पासपोर्ट केस में STF की जांच समेत मध्य प्रदेश की 5 बड़ी खबरें
Madhya Pradesh

MP Top 5 News: फर्जी पासपोर्ट केस में STF की जांच समेत मध्य प्रदेश की 5 बड़ी खबरें

मध्य प्रदेश में संदिग्ध फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क की जांच से लेकर बैंक कर्मचारियों की हड़ताल तक कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। प्रदेश में खराब मौसम का अलर्ट है, BRICS सुरक्षा व्यवस्था के कारण फ्लाइंग ट्रेनिंग गतिविधियां प्रभावित हैं और न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर MP High Court ने चिंता जताई है।

पूरा खबर
भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन खत्म, स्टाइपेंड 50% बढ़ा; अब ₹21,500 महीना, 2 पुलिसकर्मी लाइन अटैच
Madhya Pradesh

भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन खत्म, स्टाइपेंड 50% बढ़ा; अब ₹21,500 महीना, 2 पुलिसकर्मी लाइन अटैच

भोपाल में तीन दिन से चल रहा इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन सरकार से सहमति के बाद खत्म हो गया। स्टाइपेंड 50% बढ़ाकर ₹21,500 प्रतिमाह करने पर फैसला हुआ है। लाठीचार्ज और वॉटर कैनन मामले में 2 पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर जांच के निर्देश दिए गए हैं।

पूरा खबर
30 दिन में जवाब नहीं तो टैक्स असेसमेंट पूरा, MP में पेट्रोल-डीजल-CNG पंपों को बड़ी राहत; 2024-25 के मामलों के लिए 90 दिन की मोहलत
Madhya Pradesh

30 दिन में जवाब नहीं तो टैक्स असेसमेंट पूरा, MP में पेट्रोल-डीजल-CNG पंपों को बड़ी राहत; 2024-25 के मामलों के लिए 90 दिन की मोहलत

मध्य प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और CNG पंप संचालकों के वित्तीय वर्ष 2024-25 के लंबित टैक्स असेसमेंट मामलों को निपटाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। पात्र व्यापारी स्व-घोषणा के जरिए प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। आवेदन के बाद 30 दिन तक विभाग की ओर से आपत्ति नहीं आने पर असेसमेंट पूरा माना जाएगा। हालांकि टैक्स चोरी, लंबित नोटिस और रिफंड से जुड़े मामलों को इस सुविधा से बाहर रखा गया है।

पूरा खबर