4 महीने से अटकी कचरा प्रबंधन की रिपोर्ट, छत्तीसगढ़ के कलेक्टरों को अब 7 दिन का अल्टीमेटम
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की सुविधाओं के निरीक्षण और ऑडिट के लिए जिलों को निर्देश दिए गए थे, लेकिन तय समय के बाद भी रिपोर्ट शासन तक नहीं पहुंची। अब नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी कलेक्टरों से प्राथमिकता के आधार पर रिपोर्ट मांगी है।

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छत्तीसगढ़ में कचरा प्रबंधन की जमीनी व्यवस्था की समीक्षा अब प्रशासनिक सख्ती के दायरे में आ गई है। जिलों में उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण और ऑडिट कर शासन को रिपोर्ट भेजने के निर्देश के करीब चार महीने बाद भी जानकारी नहीं पहुंची। अब नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को सात दिन के भीतर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है।
प्रमुख सचिव सोनमणी बोरा की ओर से जारी पत्र में साफ कहा गया है कि निर्देशों के पालन में देरी, शिथिलता या कमी को राज्य शासन गंभीरता से लेगा।
कलेक्टरों की जिम्मेदारी बढ़ी
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत जिला स्तर पर निगरानी की जिम्मेदारी भी कलेक्टरों को दी गई है। इसी व्यवस्था के तहत जिलों के नगरीय निकायों में कचरा निपटान से जुड़ी मौजूदा अधोसंरचना का निरीक्षण और ऑडिट कराया जाना था।
30 अप्रैल 2026 को जारी पत्र में कलेक्टरों से इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और प्रारंभिक कार्ययोजना भी भेजने को कहा गया था। लेकिन चार महीने बीतने के बावजूद विभाग को अपेक्षित रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई।
अब सात दिन में भेजनी होगी जानकारी
लंबित रिपोर्टों को लेकर शासन ने अब समयसीमा तय कर दी है। सभी जिला कलेक्टरों को सात दिनों के भीतर अपने-अपने जिलों की रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
रिपोर्ट में केवल उपलब्ध संसाधनों की जानकारी देना पर्याप्त नहीं होगा। निकायों में मौजूद कमियों और व्यवस्था में जहां सुधार की जरूरत है, उसका भी स्पष्ट उल्लेख करना होगा।
बड़े कचरा उत्पादकों पर भी नियम सख्त
राज्य में होटल, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, बड़ी आवासीय कॉलोनियां और अन्य बड़े कचरा उत्पादक अपने परिसर में गीले कचरे के निपटान की व्यवस्था विकसित करने के दायरे में हैं।
इसके लिए कंपोस्टिंग या बायोगैस जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। नगरीय निकायों को 1 अप्रैल से नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए थे।
कचरे को चार हिस्सों में अलग करना जरूरी
नए प्रावधानों के तहत स्रोत स्तर पर ही कचरे को चार श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य किया गया है। इनमें गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाला अपशिष्ट शामिल है।
इस व्यवस्था का मकसद कचरे के उठाव से लेकर उसके परिवहन, प्रसंस्करण और अंतिम निपटान तक पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है।
रिपोर्ट में कमियों का भी देना होगा हिसाब
शासन ने कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि निरीक्षण के दौरान निकायों में मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर गैप की पहचान की जाए। यानी जहां संसाधनों या सुविधाओं की कमी है, उसे रिपोर्ट में दर्ज करना होगा।
इसके साथ ही उन कमियों को दूर करने के लिए राज्य शासन से किस तरह की मदद या कार्रवाई अपेक्षित है, इसका भी उल्लेख करना होगा।
अब सात दिन की नई समयसीमा में आने वाली रिपोर्टों से यह तस्वीर सामने आने की उम्मीद है कि जिलों के नगरीय निकायों में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था वास्तव में कितनी तैयार है और किन जगहों पर सबसे ज्यादा सुधार की जरूरत है।

